
बच्चों के अन्तर्मन में,
ये भाव कहाँ से आते हैं।
कहाँ से आते सूरज दादा ,
तारे क्यों छिप जाते हैं ॥
सर्दी में जो सूरज दादा हमको पास बुलाते हैं ।
गर्मी में क्यों आँख दिखाकर,
हमको दूर भगाते हैं ॥
कैसे चंदा मामा यूँ,
लटके रहते आकाश में ।
आते जब बादल काका,
क्यों डरकर वो छिप जाते हैं ॥
हमसे कहते रहो प्रेम से,
पर आपस में लडते हैं ।
ये बड़े लोग हमें वो क्यों बताते,
जो खुद नहीं कर पाते हैं॥
कोमल सा है हृदय हमारा,
फूल पंखुरी की भाँति ।
रख कर मन में नेह भाव,
हम बैर भूल भी जाते हैं॥
विनीता चौरासिया
शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश



