साहित्य

नदी

ब्रह्मनाथ पाण्डेय' मधुर'

 

नदी एक शाश्वत बहाव लिए चलती है।
कल कल ध्वनि विस्तृत आयाम
बिना रुके बिना थके
चट्टानों से टकराते हुए लम्बी दूरी तय करना
फिर सागर में मिलकर सागर स्वरूप हो जाना
इसी तरह मानव जीवन भी है
जन्म से मृत्यु तक चलता है
उस महा समुद्र में मिलकर
रत्नाकर बन जाना विशाल हो जाना
अविनाशी हो जाना
उस परम तत्व में समाहित हो जाना
अंतिम लक्ष्य पा लेना

ब्रह्मनाथ पाण्डेय’ मधुर’
वार्ड नंबर-5 काॅंटी, मुहल्ला- मेंहदावल, नगर पंचायत- मेंहदावल
पोस्ट- मेंहदावल, जिला- संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश 272271

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