साहित्य

भारत मां की बेटी

रीना पटले

बदलते वक्त की धुन पर,
लिए पहचान चलती है।
ये भारत मां की बेटी हैं ,
लिए तूफान चलती है।

(1) लिखे हर दौर की किस्मत,
यही ऐलान करती है।
सृष्टि को दिए आधार,
सुगंधित प्राण भरती है।
ये भारत मां की बेटी है,
लिए तूफान चलती है।
बदलते वक्त की धुन पर,
लिए पहचान चलती है।

(2) अंधेरा झुक गया इनसे,
उजाला डर के भागा है।
हर संघर्ष से निकली है,
यही वो तप्त ज्वाला है।
ये भारत मां की बेटी है,
लिए तूफान चलती है।
बदलते..………

(3) उसे झुकने की आदत क्या,
वो तूफानों से लड़ती है।
बनाकर जिंदगी को साज,
खुद गुलफाम बनती है।
ये भारत मां की बेटी है,
लिए तूफान चलती है।
बदलते वक्त..…………

(4) जहां पर बात हक की हो,
वहां अंगार ये बनती है।
सही इंसाफ की खातिर,
खुद ही तलवार बनती है।
ये भारत मां की बेटी है,
लिए तूफान चलती है
बदलते वक्त…………

(5) जमाने भर के गम पीकर,
कठिन राहों पर चलती है।
रखे माथे पर हर चिंता,
बड़ी अनजान बनती है।
ये भारत मां की बेटी है,
लिए तूफान चलती है
बदलते वक्त………….

(6) नहीं सीमित रसोई तक,
दफ्तर भी अब उसका है।
यह इतिहासों की गाथा है,
यही भारत की सीता है।
ये भारत मां की बेटी है,
लिए तूफान चलती है।
बदलते वक्त………….

(7) नहीं है सिर्फ कोमलता,
दिलों में आग लगती है।
वतन पर जान देती है,
देश की शान रखती है।
ये भारत मां की बेटी है,
लिए तूफान चलती है।
बदलते वक्त की धुन पर,
लिए पहचान चलती है।
” जय हिंद”

रीना पटले, शिक्षिका
शास हाई स्कूल ऐरमा,कुरई
जिला- सिवनी’ मध्यप्रदेश

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