
ताजा-ताजा हंडिया वाला ,
छाछ पिला दे…..अम्माँ री ।
संग साथ में……दुई गिंदोड़े ,
गुड़ के ला दे……अम्माँ री ।।
साग न मिलयो शहर गोटवा ,
मन खावऊ…….ललचाए रे ।
ढूंढ़ लांउ जो, तोर बहुरिया ,
कूड़ी में………..डलवाए दे ।
हाथ की रोट्टी…मोट्टी – मोट्टी ,
बना,खिला दे……अम्माँ री ।।
संग साथ में…….दुई गिंदोड़े ,
गुड़ के ला दे…….अम्माँ री ।।
रस गन्ने की….खीर बनइयो ,
बाबुन घर…… भिजवाऊंगा ।
खट्टी- मीठी….अमियाँ वाली ,
चटनी घर……..ले जाऊँगा ।
कढ़ा कढ़इया ..दूध मलइया ,
मनहु छका दे……अम्माँ री ।।
संग साथ में…… दुई गिंदोड़े ,
गुड़ के ला दे…..अम्माँ री ।।
देख पकोड़ी…. और कचौरी ,
मुँह मा आए………पानी रे ।
शहरी छोरिन ..बड़ी चटोरिन ,
पकी पकाई………खानी रे ।
सुला साथ में थपक हाथ से ,
लाड़ लड़ा दे……अम्माँ री ।।
संग -साथ में…….दुई गिंदोड़े ,
गुड़ के ला दे…….अम्माँ री ।।
दिनभर सोवे……फोन चलावे ,
महतारी से………..बात करे ।
तरह -तरह की रील बना के ,
पूरे दिन ……..बकवाद करे ।
छोड़ जाउँ क्या यहीं बहुरिया ?
कछहु, सिखा दे…..अम्माँ री ।।
संग -साथ में……..दुई गिंदोड़े ,
गुड़ के ला दे……..अम्माँ री ।।
अंजलि गोयल
किरतपुर, बिजनौर
उत्तर प्रदेश




