
देवों के देव महेश्वर को , करूँ नमस्ते वरदानी।
हे कतुक्षयी अंधविमोचन, वंदे कनकपुत्र ज्ञानी।।
ज्ञान नहीं ओंकारेश्वर हे, शिव पुराण की महिमा का।
हे विश्वेश्वर तुम कृपा करो, भर नव भाव अरुणिमा का।।
एकलिंग उग्रनाथ सुन मैं , जग में पतितन अति नामी।
मैं अज्ञानी खल कामी हूँ , भूली तुझको अज स्वामी।।
सारा तात्त्विक ज्ञान शक्ति दो, महाकाव्य दूँ रच न्यारा।।
ओजस्तेजोद्युतिधर देना, छंदों में साथ हमारा।।
पंचविंशतितत्वस्थ पचपच , हो मुझ पर प्रसन्न धन्वी।
महादेव देवेश्वर , नमस्कार करूँ तपस्वी।।
चाहें आए कितनी बाधा , उनको पिंगल हरना है।
लक्ष्य प्रतिज्ञा जो साधी है , पूर्ण मनोरथ करना है।।
चंद्रचूड़ घण्टेश्वर गोप्ता, भूल माफ सब कर देना।
गंगाधर गौरीपति तारक , छंद ज्ञान तुम भर देना।।
तेरी चरण-शरण में आई, वरद हस्त प्रभु रखना है ।
जनहितदर्शी काम बने सब , सुफल नतीजा चखना है।।
डॉ मंजुगुप्ता
वाशी , नवी मुंबई




