साहित्य

माघ मास पावन आया

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

 

मुखड़ा
अब माघ मास पावन आया,
घर-घर दीप धर्म का छाया।

पूस गयो रे, धूप सुहानी,
मकर चढ़्यो, बदली कहानी।
उत्तरायण सूरज दादा,
आँगन में उजास लाया।
अब माघ मास पावन आया।

माघी संक्रांति मेला लागे,
तिल-गुड़ मीठे बोलो जागे।
लोहड़ी जले, खिचड़ी पके,
लोक-हँसी ने रंग जमाया।
अब माघ मास पावन आया।

भोर भये गंगा नहावन,
कल्पवास को मन ललचावन।
जप-तप, व्रत हरि का सुमिरन,
तन-मन शुद्ध बनाया।
अब माघ मास पावन आया।

बसंत पंचमी आज बिराजी,
माँ शारदा वीणा साजी।
पीले-पीले सपने फूले,
विद्या ने सिर चढ़ाया।
अब माघ मास पावन आया।

भीष्म अष्टमी धर्म कथा,
त्याग-धीरज की अमर व्यथा।
माघ अमावस पितृ तर्पण,
श्रद्धा ने शीश झुकाया।
अब माघ मास पावन आया।

माघ पूर्णिमा दान महान,
तिल-वस्त्र, अन्न का पुण्य विधान।
दिन-दिन बढ़ती रौशनी में,
जीवन ने रस पाया।
अब माघ मास पावन आया।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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