
मुखड़ा
अब माघ मास पावन आया,
घर-घर दीप धर्म का छाया।
पूस गयो रे, धूप सुहानी,
मकर चढ़्यो, बदली कहानी।
उत्तरायण सूरज दादा,
आँगन में उजास लाया।
अब माघ मास पावन आया।
माघी संक्रांति मेला लागे,
तिल-गुड़ मीठे बोलो जागे।
लोहड़ी जले, खिचड़ी पके,
लोक-हँसी ने रंग जमाया।
अब माघ मास पावन आया।
भोर भये गंगा नहावन,
कल्पवास को मन ललचावन।
जप-तप, व्रत हरि का सुमिरन,
तन-मन शुद्ध बनाया।
अब माघ मास पावन आया।
बसंत पंचमी आज बिराजी,
माँ शारदा वीणा साजी।
पीले-पीले सपने फूले,
विद्या ने सिर चढ़ाया।
अब माघ मास पावन आया।
भीष्म अष्टमी धर्म कथा,
त्याग-धीरज की अमर व्यथा।
माघ अमावस पितृ तर्पण,
श्रद्धा ने शीश झुकाया।
अब माघ मास पावन आया।
माघ पूर्णिमा दान महान,
तिल-वस्त्र, अन्न का पुण्य विधान।
दिन-दिन बढ़ती रौशनी में,
जीवन ने रस पाया।
अब माघ मास पावन आया।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




