
पिंडदान का क्या करना,जब जीते जी नहीं खिला पाए,
जिसने त्यागे सपने अपने,उनको नहीं जिला पाए,
अरे जबतक है वो, पूजो उनको,उनको जैसे ना कोई होगा,
खुद रोओगे याद उन्हें कर,जिन्हें अबतक नहीं भुला पाए,
हां माना डाटा है उन्होंने,ताकि अनुशासन सा जीवन हो,
हां माना क्रोधित हुए है हम पर, ताकि जीवन चंदन हो,
हां माना समझाते पल पल,ताकि जीवन को समझ सके
हां माना मां बाबू जी अड़ियल है,ताकि ये जीवन संवर सके,,
जैसे सोते गोदी में उनके,ना खुद को कभी सुला पाए
पिंडदान का क्या करना…..II १ II
जब तक है वो हर सपनों में,पंख लगेगा ये तय है
हार नहीं होगी रण में, विजयी रहोगे ये तय है
आशीष लिया जो मात पिता का,सुखी रहोगे ये तय है
पर उनको यदि दुखी करोगे तो दुखी रहोगे ये तह है
अनगिनत प्रश्न किए हल जिसने,हम एक नहीं सुलझा पाए
पिंडदान का क्या करना…..II २ II
संजय पाण्डेय “सरल”
जौनपुर,उत्तर प्रदेश




