
संत विवेकानंद ने , किया विश्व में नाम।
योग और वेदान्त पर,चलना उनका काम।।

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आध्यात्मिक गुरु वे रहे,किया समाज सुधार।
धर्म सम्मेलन में दिया , जग को नया विचार।।
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जीवन में हो सादगी , शिक्षा हो अनिवार्य।
मानव सेवा ही रहे , शाश्वत व अपरिहार्य।।
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अपने गुरु के नाम पर,किया समाज सुधार।
मठ की करी स्थापना , सेवा जिसका सार।।
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अभय बनो तुम सर्वदा,शिक्षा पर दो ध्यान।
ऐसे होंगे यदि युवक , पीढ़ी बने महान।।
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‘ज्ञानयोग’ व ‘राजयोग’, देतीं उच्च विचार।
अल्प आयु में कर गये ,परम लक्ष्य साकार।।
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आशा बिसारिया चंदौसी




