
अर्थ स्वरूप आधार, रहते हैं निराहार, आत्मनिर्भर अटूट, करते साधना।
मेहनत की मिशाल, बने स्वयं की ढाल, बहाते खूब पसीना, सहते यातना।।
करें श्रमिक निर्माण, मुश्किल में डालें प्राण, मिले नहीं है सम्मान, प्रेम से थामना।
श्रमिक दिवस आया, आज विश्व है मनाया, इनका रखना ख्याल, कोमल भावना।।
सपने इनके कमाल, खुशी से चमके भाल, करते नहीं गुमान, अल्प है चाहना।
संघर्षो से रखें नाता, कभी नहीं घबराता, लोभ-मोह रहे दूर, आए न भागना।।
कर्म ही होता है धर्म, जिंदगी का यही मर्म, सेवा भाव हिय भरा, मत नकारना।
उगे सूर्य काम करें, धैर्य हृद सदा धरें, सूर्य ढले घर चलें, करें आराधना।।
निलम अग्रवाल दीक्षिता




