
कर रहे प्रवासी योगदान
निज देश की प्रगति में हर दिन।
रह रहे जहां जिस देश में भी,
उसकी प्रगति में भी पल छिन।।
कर रहे समृद्ध स्वयं को वह,
निज देश को भी कर रहे सशक्त।
वह कार्य कर रहे इसीलिए,
जीवन खुशहाल रहे हर वक्त।।
उद्यम, व्यवसाय, नौकरी हित,
प्रवासी बने, कुछ हो विकसित।
उन सबकी कार्यकुशलता से,
निज देश भी होता लाभान्वित।।
डॉ.अनिल शर्मा ‘अनिल’
धामपुर



