
चमकते रेत को वो लोग आब लिखने लगे।
बुझे चराग को भी आफताब लिखने लगे।।
नहीं जो जानते मतलब रईस का तो भी।
बड़े मज़े से वो खुद को नवाब लिखने लगे।।
उड़े बहुत जो कभी बाप की कमाई पर।
कमाना खुद पड़ा तो अब हिसाब लिखने लगे।।
जो बद्तमीजी से मशहूर थे ज़माने में।
वो आज नाम के आगे जनाब लिखने लगे।।
कलम पकड़ने से भी वो डरते बहुत ज्यादा
जुटा के आज वो हिम्मत जवाब लिखने लगे।।
नूर फातिमा खातून नूरी
जिला -कुशीनगर




