साहित्य

मुक्तक

विनीता चौरासिया

न जाने कितने रफू किये हैं हमने इस नाजुक दिल पर ।
मुस्कानों के सिले हैं पेमद हमने इस नाजुक दिल पर ।
एक नहीं कई बार है टूटा
रिश्तों के प्रभंजन से,
नेह की फिर से नींव रखी, हमने इस नाजुक दिल पर ।
विनीता चौरासिया
शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश

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