साहित्य

कब आओगे मोहन

प्रिया काम्बोज प्रिया

कब आओगे मोहन अखियां तरह रही है
दरश को तेरे ये कब से बरस रही है
कहीं भूला तो ना दिया अपनी प्रियशी राधा को
मिलों एक बार गुजारिश कर रही है

गये हो जब से कही चैन नहीं आता है
बिन तेरे कुछ ओर ना मुझे भाता है
नदियां , ताल तलैया, वृंदावन की गलियां
गोकुल का आंगन सब तुझे बुलाता है

ग्वाल बाल ,गईया ,बछिया सब राह तेरी तकते हैं
कब आयेगा श्याम यही माला जपते हैं
माखन चोरी को राह तेरी गोपियां देखें
अब तो माखन भी झिके में नहीं रखती
कब आओगे मोहन बस तुम्हें ही बुलाती है

प्रिया काम्बोज प्रिया ✍🏻

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