साहित्य

पेड़ बोल उठे

दिनेश पाल सिंह दिलकश

मत काटो पेड़ों को—
ये लकड़ी नहीं,
ये हमारी साँसों के
मूक प्रहरी हैं।

आज कुल्हाड़ी तने पर चली है,
कल हमारी साँसों पर चलेगी।

मत काटो पेड़ों को—
ये शिकायत नहीं करते,
ये दुआ देते हैं।

फल न सही,
छाया देते हैं,
हवा देते हैं,
जीने की वजह देते हैं।

अगर ज़िंदा रहना है,
तो पेड़ों को
जीने देना होगा।

पेड़ बचेंगे तो
भविष्य बचेगा
एक पेड़ बचाओ
एक जीवन बचाओ।

🌱 पर्यावरण संदेश 🌱

पेड़ किसी एक धर्म,
किसी एक जाति
या किसी एक शहर के नहीं,
ये पूरी मानवता के रखवाले हैं।

जहाँ पेड़ नहीं होंगे,
वहाँ मंदिर सूने होंगे,
मस्जिदें रोएँगी,
गिरजों की घंटियाँ
दर्द में बजेंगी।

आइए संकल्प लें,
एक पेड़ लगाएँ,
किसी बच्चे की मुस्कान के लिए,
एक पेड़ बचाएँ,
किसी माँ की अगली साँस के लिए।

दिनेश पाल सिंह दिलकश
संभल (उ.प्र.)

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