साहित्य

गणतंत्र दिवस मेरा स्वाभिमान

मुल्क राज "आकाश"

 

भारत के शौर्य की गाथा ओज स्वर में गाता है

अलग-अलग भाषाओं के गीत सुनाये जाता है

अमर शहीदों के बलिदानों को जिसने है नमन किया

हिम की चोटी पर जिसने वर्चस्व अपना जमा दिया

दुश्मन को घुटने के बल जिसने देखो टिका दिया

भूल गए कर्तव्य जो उनको याद दिलाता है
भारत के शौर्य की गाथा विश्व पटल पर सुनाता है

यह है तिरंगा हिंदुस्तान का घर-घर में लहरा रहा
आजादी के शहीदों की सबको याद दिला रहा

भारत मां की रक्षा का जिसने जीम्मा लिया हुआ
सरहद पर सिंह की भांति मेरा तिरंगा डटा हुआ
“गणतंत्र दिवस” के अवसर पर नमन आज में करता हूं
तेरी शान ना घटने दूंगा वचन आज मैं देता हूं

मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश
8010239638

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