
दर्श कर दर्शन विषय को, भाव ऐसे पुलकित हुए,
आत्मा में ही परमात्मा के वास का एहसास किए।
जो बसा है ज़र्रे-ज़र्रे में, हर श्वाँस के आवागमन में,
ज्ञात हो अज्ञात हो, या फिर हो जड़ चेतन जगत,
हर घड़ी,हर क्षण जिसकी डोर से हैं बँधे हुए,
दरश उसी का करते हुए,कर्मपथ पर चलते हुए।
इंतज़ार है बस उसी पल का जो सलोना मिलन होगा,
जाने कौन सा शुभ दिन होगा,वो कौन सा सुपल होगा। सुषमा श्रीवास्तव, रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।




