साहित्य

लोक नाट्य शैली-नौटंकी कृतिकार क विचार

चन्द्रगुप्त प्रसाद वर्मा "अकिंचन"

लोक-चेतना आ ओकर मूल स्वर समझे ख़ातिर, लोक -अभिव्यक्ति क धार पहटे बदे लोक अनुरंजन के नाना विधि तउर तरीका क ज्ञान मेधा बहुते जरुरी होला। जानकारी न होले से इ लोक-शैली क जमीनी
व्याख्या पुरहर तरीके से मुमकिन ना हो पायी। लोक
जेतना व्यापक बा ओकर फलक भी ओतना ही फइलल बा। सरल सहज लौकाई पडे़ वाला लोक,आ ओकर अनुरंजन क विविध आयाम,अपने आप में खुदही एगो दर्शन ह।यानी माटी के जड़ से जुड़ल लोक अउर ओकर नाना विध आयाम स्वयमेव में दर्शन हवे।लोक अनुरंजन से जुड़ल एक अइसन विधा जेकर इतिहास समय चक्र के बहाव के साथे साथे,लोक जनमानस क बदलाव,परिवर्तन के अपने में घोटत आगे बढ़त रहल अउर ग्रामीण भारत के आँचलिक संस्कृति क आपन शैली अउर शउर लोक के हवाले पे टिकल विषय माफिक मनोरंजित करत रहल।भारत में नौटंकी क आपन एगो खास परम्परा
अउर मोकाम रहल।ऐकरे विधा क कइगो केन्द्र रहल,
आजादी के लडा़ई में एहि विधा के जरिये जन चेतना
के हिलाये,डुलाये,जगाये बदे जउन कार भइल ओके भुलावल नाही जा सकेला।नौटंकी क कथावस्तु भी
ऐतिहासिक आ समाज के दिशा दशा दे। जुलुम के
खिलाफ लडे़ अउर ओह समय क उर्दू फारसी के शब्दन क मिलावट,आम लोगन में लोकप्रिय बनइले में बहुतहि योगदान रहल बा।गद्य आ पद्य क मिलल जुलल शैली में लोकभाषन के शब्दन क प्रयोग इ विधा के लोकप्रिय बना देहलस।आजु के युग में लोक चेतना प्रकटन क इ विधा जीयत जागत रहे,ओकर खनक लोगन ले चहुँपत रहे इ निगाहे में धइके ही इ मोनोग्राफ के लाइल गइल बा,इ उम्मेदे के साथे कि इ आपन सार्थक भूमिका निभाई।🙏

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