साहित्य

आशा बिसारिया

जिसपै युग-युग नाज रहेगा,अपने हिंदुस्तान को
आओ हम सब याद करें,एक ऐसे वीर जवान को
वंदे मातरम्-4
ओडिशाके कटक नगर में,कायस्थ कुल में जन्म लिया
पिता जानकीदास और , माँ प्रभावती को धन्य किया
विद्या बुद्धि पा सुभाष ने , सिविल सेवा में नाम किया
लेकिन तब भी भूल न पाए ,भारत के अभिमान को
आओ…..

कलकत्ते के मेयर बने और , प्रेसीडेंट ट्रेड यूनियन के
कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ा,संग रहे फिर जर्मन के
‘आजाद हिन्द फौज’ बनाई ,पक्ष में पूर्ण स्वतंत्रता के
मुझे खून दो मैं आजादी , दूंगा हिन्दुस्तान को
आओ……
कलकत्ते का ‘हालवेट – स्तम्भ’ मिलाया मिट्टी में,
पेशावर,काबुल और मास्को,बर्लिन पहुँचे फुर्ती में
रूस को जाते समय हाय,दुर्घटना घट गयी पर भर में
टोकियो का ‘रैंकोजी मन्दिर’ ,कहता उनकी शान को
आओ…….
आशा बिसारिया चंदौसी

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