साहित्य

कविता ए झा

नेता जी

उस कटक को नमन,
जहाँ हुआ था नेता जी का जनम।
2021 में भारत ने सौभाग्य मनाया,
23 जनवरी पराक्रम दिवस मनाया।
बेशक! देर सही दुरुस्त रही!
इससे अच्छी कोई बात नहीं ?
1897 को जन्में सुभाष चंद्र बोस,
मृत्यु का कारण नहीं हुआ उद्घोष।
स्वतंत्रता संग्राम में,
अग्रणी सबसे बड़े नेता वे
जो जापानी सहयोग से
फौज बना फिरंगी को ललकारे थे।
उनका दिया जय हिंद का नारा था,
जो देशभक्तों को खूब लगा प्यारा था।
अंग्रेजों को कहकर ललकारा था,
“तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा”
जो राष्ट्र भक्तों के सर चढ़ के बोला था,
जिससे गद्दार फिरंगी डोला था।
उनकी मान्यता थी
कि संघर्ष बिना जीन्दगी नहीं
वे सादगी में सुमार थे जो खाते थे,
वही अपने सैनिकों को खिलाते थे।
झुकना पड़े वीरों की तरह झुकना
वतन पे मौत से शिकवा न करना।
वे नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित हुए!
फ्री इंडिया सेंटर, आज़ाद हिंद रेडियो की स्थापना किए।
ऐसे वीर सपूत ही नेता जी कहलाए,
जिनके अदम्य साहस ने देश से अंग्रेजों को भागाए।

कविता ए झा
नवी मुम्बई

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