बिहार

बालिका का सशक्तिकरण ही देश की असली प्रगति: सत्येन्द्र कुमार पाठक

जहानाबाद। राष्ट्रीय बालिका दिवस के गौरवशाली अवसर पर प्रख्यात साहित्यकार एवं इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने समाज में बेटियों की महत्ता और उनके अधिकारों पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हर साल 24 जनवरी का दिन भारत में सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि बालिकाओं के प्रति सम्मान, सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के संकल्प का प्रतीक है। सत्येन्द्र कुमार पाठक ने बताया कि भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2008 में राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा जैसे बुनियादी हक प्रदान करना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा: “बालिका केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि वह परिवार और समाज को जोड़ने वाली मुख्य स्तंभ है। जब एक बेटी शिक्षित और सशक्त होती है, तो पूरा राष्ट्र प्रगति करता है। इतिहासकार पाठक ने जानकारी साझा की कि यह दिन केवल बालिकाओं को समर्पित नहीं है, बल्कि इसका महत्व और भी व्यापक है: उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस: 24 जनवरी को ही उत्तर प्रदेश राज्य अपना स्थापना दिवस मनाता है, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। वैश्विक स्तर पर आज का दिन ‘शिक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है, जो जीवन में ज्ञान के महत्व को दर्शाता है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाज से अपील की कि लड़कियों से जुड़ी सामाजिक कुरीतियों को जड़ से मिटाने की जरूरत है। शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही वे अस्त्र हैं जिनसे बेटियां अपने सपनों को साकार कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि बालिकाओं के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता ही एक सभ्य समाज की पहचान है। आज का दिन हमें यह याद दिलाता है कि यदि हम अपनी बेटियों को समान अवसर और सुरक्षित वातावरण प्रदान करें, तो वे आसमान की बुलंदियों को छूने का सामर्थ्य रखती हैं।

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