साहित्य

आज

सुमन बिष्ट

आज

आज अगर सुख की धूप छिटकी है,तो
कल ग़म की छाया हो ये मालूम नहीं।
हर बीता पल यादों में रच बस जाये,
कितनी साँसे बची हैं ये मालूम नहीं।१

कभी हँसी की हल्की सी खनक,
कभी आंसूओं का मौन बयान।
दोनों ही संग मिलकर लिखते हैं,
इस जीवन का कटु सच्चा गान।२

जो वक़्त मिले उसे जी लो पूरा,
जो बीता उसे मानो तुम अधूरा।
वक्त नहीं सुनता किसी की पुकार
घूमकर करता है चक्र अपना पूरा।३

पन्नों में कुछ लिखावट होगी,
कुछ काली कुछ रंग-बिरंगी होगी
कहीं अधूरी यादों की नमी,
कहीं कुछ उम्मीदें पूरी होंगी। ४

कल की चिंता बोझ न बने, तो
आज ही आशा के दीप जलाओ।
अपने-अपने हिस्से की रोशनी को

तुम चारों तरफ खूब फैलाओ।५

रिश्तों के कुछ अनकहे पल,
थाम लो अपने जज्बातों को।
कह दो अपने दिल की बात अभी,
कल पर न टालो तुम बातों को।६

आज अगर सुंदर मुस्कान सजी,
तो कल की राह सरल बनेगी।
जीना ही सबसे बड़ा सच है
बाकी तो सब है बहानेबाज़ी।७

इसलिए इस क्षण को चुनो,जहाँ
साँसों में संगीत धड़कता होगा।
आज जियो, यही है जीवन,
छोड़ो चिंता कि कल कैसा होगा।८

सुमन बिष्ट, नोएडा

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