
गणतंत्र हमारी हस्ती है,
इस हस्ती में वो मस्ती हैं,
देशप्रेम की धारा जब
जनजन में बसती है,
धींगामस्ती सस्ती है,
खूब पतवार चलाते जाओ,
राष्ट्रप्रेम की किश्ती है,
कल कल नदियां बहती है
किश्ती बहुत मचलती है,
जब भी पार लगती है,
धवल वस्त्र में उसमें से
भारतमाता उतरती है,
आनंद की लहर बिखरती है,
तीन रंग के तिरंगे की
निराली छटा निखरती है।।
–मदन वर्मा ” माणिक ”
इंदौर, मध्यप्रदेश




