
जन-जन के मन में दीप जले,स्वतंत्र चेतना जाग उठी।
संविधान बना पथ-प्रदर्शक,नव भारत की राह सजी।
अधिकार मिले हर नागरिक को,कर्तव्य संग संतुलन है।
न्याय, समता, बंधुत्व लेकर,आगे बढ़ता हर जन है।
वीरों के बलिदानों से ही,स्वर्णिम यह इतिहास रचा।
तिरंगे की शान निराली,देख हृदय अभिमान रचा।
गणतंत्र का यह पावन पर्व,एकता का संदेश दे।
भारत माता की जय-जय हो,विश्व पटल पर तेज़ दे।
संविधान की अमर वाणी,जनहित का आधार बनी।
शोषित-पीड़ित को बल देती,न्याय-धारा प्रवाह बनी।
लोकतंत्र की धड़कन में,जन-आस्था की शान बसी।
मत की शक्ति सर्वोपरि,जिससे हर पहचान बसी।
भाषा-वेश अनेक हमारे,एक राष्ट्र की धारा है।
विविध रंग मिलकर कहते,भारत सबका प्यारा है।
आओ मिलकर शपथ लें हम,देश हित में कर्म करें।
गणतंत्र की मर्यादा को,जीवन भर हम धर्म करें।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




