साहित्य

जरूरी है

साधना मिश्रा विंध्य

मातृभूमि के हर एक पथ पर

एक बलिदान जरूरी है,
अपने गणतंत्र पर हर भारतीय
का अभिमान जरूरी है।

संविधान की एक-एक पंक्ति
करती दूर मजबूरी है,
लोकतंत्र को महिमा मंडित
करना बहुत जरूरी है।

जिस माटी के खातिर
वीरों ने लहू बहाया है,
उस मिट्टी में स्वाभिमान
की खेती बहुत जरूरी है।

तिरंगे की छाया में है
जन-मन ने आकर लिया ,
स्वाभिमानी तिरंगे का
हो विस्तार जरूरी है।

लोकतंत्र की शौर्य गाथा
गूंजे गली मोहल्ले में,
हर भारतीय के मन में
गंजे जयकार जरूरी है।

राष्ट्र यज्ञ में जिन वीरों
ने प्राण गंवाए हैं,
सम्मान में उनके नतमस्तक हो
प्रण यह बहुत जरूरी है।।

साधना मिश्रा विंध्य
लखनऊ उत्तर प्रदेश

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