
जब तक सूरज चाँद रहेगा,
भारत हमारा आज़ाद रहेगा,
केवल सतहत्तर वर्ष तक नहीं,
युगों युगों तक विश्वगुरु रहेगा।
लुटेरों ने सोने की चिड़िया,
लूटा था बड़े इत्मीनान से,
फिरंगियों ने राज किया था,
बर्बाद किया देश को बाँट के।
गाँधी, नेहरू, सुभाष, तिलक,
शहीद भगत सिंह बलिदानी,
चंद्रशेखर आज़ाद सरीखे लड़े,
वतन के लिये दिया था कुर्बानी।
जन गण मन के गीत रचे थे,
सुज़लाम, सुफ़लाम गाते थे,
शस्य श्यामला भारत माँ पर,
सब मिलकर जान लुटाते थे।
शिक्षा, संस्कृति भारत की,
सनातन से मिली धरोहर है,
उसके बलबूते आज़ाद हुये,
गणतंत्र हमारा अक्षुण्य है।
आदित्य हम विश्वगुरु थे,
अब फिर से विश्व गुरु हैं,
गणतंत्र दिवस मना रहे हैं,
जन गण मन गीत गा रहे हैं।
विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ:26 जनवरी 2026
स्वरचित/ मौलिक




