साहित्य

मुट्ठी बांधे जन्म लिया,हाथ पसारे जाना है

एस के कपूर"श्री हंस"

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मुट्ठी बांधे जन्म लिया हाथ पसारे जाना है।
इस एक अनमोल जीवन का यही ही तराना है।।
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आपके वचन कर्म चरित्र ही आप की पूंजी है।
लोगों की यादों में रहें यही सफलता की कुंजी है।।
बाकी सब तो इस धरा का इस धरा पर रह जाना है।
मुट्ठी बांधे जन्म लिया हाथ पसारे जाना है।।
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शांत शीतल मन तो केवल धैर्यवान का होता है।
क्रोध अहंकार में मानव सब कुछ अपना खोता है।।
यह एकबार का सौदा फिर लौटकर नहीं आना है।
मुट्ठी बांधे जन्म लिया हाथ पसारे जाना है।।
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मनुष्य की असली ताकत उसकी सोच होती है।
छिन्नभिन्न करदे शक्ति वह घृणा की मोच होती है।।
तुझको चाहता केवल प्रेम से ही सारा जमाना है।
मुट्ठी बांधे जन्म लिया हाथ पसारे जाना है।।
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।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।

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