साहित्य

ग़ज़ल

चनरेज राम अम्बुज

शान्त दरिया में वो हलचल भी मचा सकता है।
अपनी नफ़रत को  भरा प्यार  बता  सकता है।

मेरा   हमदम   मेरा  हमराज  बड़ा  सातिर  है,
दाग़  दामन  पे  लगा  पाक़  बता   सकता  है।

सिरफिरा  आदमी  ये बात  भला  क्या जाने,
गुस्सा  इन्सान  को  हैवान  बना   सकता  है।

साज  श्रृंगार  किये  राह में  निकला न करो,
ये  तेरा  हुस्न   मिरी  नींद  चुरा   सकता  है।

पूछ  मत रात को मुफ़लिस ने बितायी कैसे,
आसमाँ  ओढ़ जमीं को ही बिछा सकता है।

चनरेज राम अम्बुज

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