साहित्य

जनवरी की ठंड

विनीता चौरासिया

जनवरी की ठंड ने भी क्या -क्या किया कमाल
अच्छे-अच्छे लोगों का कर दिया बुरा है हाल
हाथ थर-थर है काँपे, आग सब मिल कर तापें॥

बाजार में भी सर्दी ने ऐसा किया धमाल
हीटर बेचने वालों को कर दिया है मालामाल
सब कुछ महंगा दिखता, धड़ाधड़ फिर भी बिकता ॥

हाड़ कँपाती ठंड में किट- किट करते दाँत
दिल की दिल में ही रह जाती निकल न पाती बात
पवन हिम सी है शीतल, बड़ा ठंडा अवनीतल॥

चारों तरफ कुहासा छाया धुंध रहे भरपूर
कोहरे की है चादर फैली, छिपा रवि का नूर
चाँद भी फीका- फीका, ठंड से न कोई जीता॥

अंदर से बंदर ले गया पश्मीने की शाल
ठिठुर-ठिठुर कर ठंड में, होते हम बेहाल
हाल अब किसको सुनायें ये दुखड़ा किसको बताएं॥

हालाँकि ये शाल घर में, एक नहीं दो चार
पर पशमीने की शाल में, छिपा था माँ का प्यार, प्यार वो किसको दिखाएं, राज ये किसको बताएं॥
विनीता चौरासिया
शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश

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