साहित्य
जाति के चंगुल में

यह देश
फंसा है
जाति के चंगुल में
जहां इंसानियत
मानवता रो पड़ती है
जहां होती है
सामाजिक भेदभाव
यह एक दुर्गंध है
वीभत्स होते समाज का
जातिगत राजनीति से
एक राजनीतिक माहौल
विकृत रूप ले लेती है
यह जातिगत भेदभाव
….
जयचन्द प्रजापति
प्रयागराज




