
विभिन्न रंगों से भरे हुए हो
मेघों से मिलते रहते हो
तुम सबको इतना भाते हो
पास कभी न तुम आते हो
देख धरा से मन होय हर्षित
रंगों से करते हो आकर्षित
वर्षा जाने के बाद आते हो
अदृश्य क्षण में हो जाते हो
खामोशी से प्रकट होते
खामोशी से ही अदृश्य
रंग बिरंगे सुन्दर सार
दिखते शान्त वृत्ताकार
जो देखे हर्षित हो जाय
झूमे खुशी से चिल्लाये
मन में उमंग लहर जगायें
स्वयं को स्थिरता ही भाये
नहीं गुरूर ऊचाईयों का
सत रंगों का न अहंकार
लगता जैसे ये जानते हो
अहंकार संग जीवन बेकार
मीनाक्षी शर्मा




