
इस जवानी में कोई सोता है क्या।
कीमती यह पल कोई खोता है क्या।
राह में यूं बैठकर क्या है विजय..
भाग्य पर यूं कोई रोता है क्या।
जो न तेरा था कभी अपना नहीं..
ऐसा रिश्ता कोई ढोता है क्या।
जानते है चोट उसने दी जब..
बीज ग़म का कोई बोता है क्या।
सत्य ‘वरदा’ मौन रहता देखता..
झूठ जैसा कोई तोता है क्या।
वर्तिका अग्रवाल ‘वरदा’
वाराणसी
उ.प्र.



