साहित्य

ग़ुस्से में धैर्य व ग़लतियाँ में झुकना

विद्यावाचस्पति डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र, ‘आदित्य’

खुद को खुश करने का सबसे अच्छा
तरीका किसी और को खुश करना
या ख़ुश रखने की कोशिश करना,
औरों को खुश करें, स्वयं भी ख़ुश रहें।

यह स्मरण रहना चाहिये कि हमारी
जीभ कभी स्वयं ही नहीं फिसलती है,
जो मस्तिष्क में चलता है वही बात
हमारी ज़ुबान पर आ ही जाती है।

जीवन में कभी किसी की की गई
भलाई व्यर्थ नहीं जाती है, वह कब
किस रूप में लौट कर आ जाएगी
ईश्वर के अलावा कौन जानता है।

कहते हैं कि सबसे अच्छा गुण मौन
धारण करना, शांतचित्त रहना होता है,
उससे भी अच्छा गुण प्रेम भरी बाँतों
से मौन को मुस्कान में बदल देना है।

ग़लतियाँ तो होती हैं, परिस्थिति की
वजह से ही होती हैं, जानबूझकर नहीं,
गलती के पीछे वजह जानना ज़रूरी
होता है चाहे अपनों या परायों की हों।

ग़लतियाँ और रिश्तों का सीधा
सम्बंध अपनों या परायों से होता है,
इसलिए रिश्तों को सम्मान देने के
लिए गलती की वजह जानना होता है।

जैसे थोड़ा सा धैर्य रखकर ग़ुस्से
पर नियंत्रण किया जा सकता है,
वैसे ही ग़लतियों में थोड़ा सा झुक
कर रिश्तों को निभाया जा सकता है।

आदित्य ग़ुस्से में धैर्य धारण रखना
और ग़लतियों में माफ़ी माँगना और
माफ़ करना सबसे बड़े सद्गुण होते हैं,
ऐसे ही सबसे सम्बंध निभाये जाते हैं।

विद्यावाचस्पति डा० कर्नल
आदिशंकर मिश्र, ‘आदित्य’
लखनऊ ‎

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