
नौ महीने कोख में पाला है तुझे
खून से अपने सींचा है तुझे
मुझे तू यूं बदनाम ना कर
ममता की मेरे ऐसी आजमाइश ना कर
जुबां से बोलने से पहले समझ जाती थी मैं
छूकर तुझे हर भाव समझ जाती थी मैं
दूध को मेरे यूं इल्जाम ना कर
ममता की मेरे ऐसी आजमाइश ना कर
उंगली पकड़ चलना सिखाया था
हर ख्वाहिश को पूरी कराया था
लहू को मेरे यूं कलंकित ना कर
ममता की मेरे ऐसी आजमाइश ना कर
तेरे निवाले के लिए भूखी रही थी मैं
तू सुला ना जाने कितनी रात जगी थी मैं
मेरे संस्कारों का यूं तिरस्कार ना कर
ममता की मेरे ऐसी आजमाइश ना कर
तू रहे सदा खुश ये दुआ करता है दिल मेरा
मेरी गरीबी का ना पड़े तुझ पर साया
मेरे आखिरी वक्त को बोझ ना कर
पुराने बर्तन ही पड़ी रहूंगी घर के कोने में
तू सरेआम ममता की ऐसी आजमाइश ना कर
प्रिया काम्बोज प्रिया ✍🏻
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




