
मीरा को गिरधर मिले, ना राधा को श्याम
तब भी उनकी प्रीत का, हुआ नहीं अवसान
हुआ नहीं अवसान, प्रीत ने रंग दिखाया
दोनों का ही नाम, हरि के संग में आया
भक्ति मरकत मणि सी, कोई काँच ना हीरा
विचलित हुई जग से, कभी राधा ना मीरा॥
विनीता चौरासिया
शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश




