उत्तराखंड

गढ़वाल और कुमाऊँ में एक-एक “स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन” की स्थापना की दिशा में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक संतुलन और मूल स्वरूप, देवत्व की रक्षा के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध

हल्द्वानी|06, फरवरी 2026
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एमबी इंटर कॉलेज मैदान हल्द्वानी प्रांगण पहुंचकर दिव्य जागृति संस्थान द्वारा आयोजित शिव कथा में पहुॅचकर सहज ज्योति पूजन में शामिल होकर 108 थाली ज्योति प्रज्ज्वलित की, तथा प्रदेश की सुख शान्ति की कांमना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया ।

मुख्यमंत्री ने शिव कथा वाचन का श्रवण करते हुए उपस्थित शिव भक्तजनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भगवान शिव की कृपा से आयोजित इस पावन शिव कथा में आकर अत्यंत गौरवशाली होने का अनुभव हो रहा है और यह सोभाग्य है कि यहाँ आने का अवसर मिला।

उन्होंने कहा कि दिव्य जागृति संस्थान द्वारा समाज में नकारात्मक सोच को बदल कर सकारात्मकता में बदलने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक, दिव्य गुरु,परम पूज्य9 आशुतोष महाराज जी को कोटि-कोटि नमन किया। महाराज जिनकी कृपा, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा ने असंख्य लोगों को धर्म, सेवा, करुणा और सदाचार के पथ पर निरंतर प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि ये परम सौभाग्य है कि 000pहल्द्वानी की इस पुण्य धरा पर, भगवान शिव की महिमा से ओत-प्रोत इस शिव कथा के माध्यम से सभी के साथ महादेव के श्रीचरणों में शीश नवाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शास्त्रों में भगवान शिव के अद्वैत स्वरूप का अत्यंत सुंदर वर्णन करते हुए लिखा गया है कि.. न कर्ता, न क्रिया, न योगः, न ज्ञानं, न च भोगः। शिवोऽहम् शिवोऽहम्॥ अर्थात मैं न कर्ता हूँ, न कर्म हूँ, न योग हूँ, न ज्ञान और न ही भोग हूं। मैं शिव हूँ, मैं शुद्ध चेतना हूँ और मैं ही शिव स्वरूप हूँ। ये श्लोक हमें बोध कराता है कि शिव स्वयं हमारे भीतर की चेतना में विद्यमान हैं। उन्होंने कहा कि जब अहंकार विलीन होता है,0 द्वेष समाप्त होता है, करुणा, समरसता और त्याग हमारे जीवन में उतरते हैं, तब मनुष्य स्वयं शिवमय हो जाता है।

उन्होंने कहा कि संपूर्ण कुमाऊँ अंचल सदियों से धर्म, अध्यात्म और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। हमारी ये भूमि तप, साधना और शिव भक्ति की एक जीवंत और अक्षुण्ण परंपरा को आज भी संजोए हुए है। उन्होंने कहा कि हमारे प्राचीन ग्रंथों, पुराणों और ऐतिहासिक संदर्भों में इस क्षेत्र के मंदिरों, शिवालयों, धार्मिक स्थल और पवित्र जल स्रोतों का उल्लेख मिलता है, जो इस बात का प्रमाण है कि ये धरा युगों-युगों से सनातन और शैव परंपरा की साधना भूमि रही है। इसलिए शिव कथा का इस पुण्य भूमि में होना इसको और अधिक दिव्य बनाता है।

उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत की सनातन संस्कृति संपूर्ण विश्व में लहरा रही है। वैश्विक स्तर पर प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक चेतना आज वैश्विक मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर, संकल्पबद्ध भाव से कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने “विकल्प-रहित संकल्प” को पूर्ण करने के लिए पूरी दृढ़ता और निष्ठा के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
इस अवसर पर विधायक कालाढुंगी बंशीधर भगत, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, मण्डलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी मंजूनाथ टीसी सहित संस्थान के पदाधिकारी, शिवभक्त आदि उपस्थित थे।

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