जयपुर में ‘नवगीत दिवस समारोह’ : नवगीत पर सार्थक विमर्श एवं काव्य-गोष्ठी सम्पन्न

जयपुर। जयपुर की साहित्यिक संस्था जयपुर काव्य साधक एवं समरस साहित्य सृजन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ‘नवगीत कुटुंब’ की राष्ट्रीय पहल पर कीर्तिशेष नवगीत-कवि राजेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा संपादित प्रथम नवगीत संकलन ‘गीतांगिनी’ के प्रकाशन दिवस 05 फरवरी को देशभर में ‘नवगीत दिवस’ के रूप में मनाया गया। इसी क्रम में जयपुर में भी भव्य नवगीत दिवस समारोह का आयोजन किया गया।
दिनांक 05 फरवरी को दोपहर 12 बजे से सायं 4 बजे तक शांति नगर, दुर्गापुरा स्थित हनुमान वाटिका में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता ख्यातिलब्ध नवगीत-कवि मुकुट सक्सेना ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिष्ठित नवगीत कवि जगदीश मोहन रावत तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में अलवर से पधारे वरिष्ठ कवि एवं साहित्यिक संस्था ‘सृजक’ के सचिव रामचरण ‘राग’ उपस्थित रहे ।

प्रथम सत्र में नवगीत पर वैचारिक विमर्श का संचालन एवं विषय- प्रवर्तन नवगीत कवि एवं समालोचक अशोक शर्मा ‘कटेठिया’ ने किया। उन्होंने “मानव विकास, काव्य यात्रा और नवगीत : एक आलोचकीय हस्तक्षेप” विषय पर विस्तार से विचार प्रस्तुत किए।
वरिष्ठ गीतकार रामचरण ‘राग’ ने “समकालीन संदर्भ में नवगीत की प्रासंगिकता” विषय पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। डॉ.जितेन्द्र प्रसाद माथुर ने “नवगीत : आंदोलन, प्रवृत्ति या स्वतंत्र विधा” पर विचार तथा लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’ ने “नवगीत : स्वरूप, शिल्प, संवेदना और समकालीन धाराएँ” विषय पर अपना वक्तव्य पढ़ा।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि जगदीश मोहन रावत, अध्यक्षीय वक्तव्य में मुकुट सक्सेना तथा डॉ. नवल दुबे ने भी नवगीत की परंपरा, विकास और सूक्ष्म शिल्पगत विशेषताओं पर अपने विचार साझा किए।
द्वितीय सत्र : गीत-नवगीत काव्य गोष्ठी आयोजित गीत-नवगीत काव्य गोष्ठी का संचालन कवयित्री डॉ. सुशीला शील ने किया। गोष्ठी का शुभारंभ मंजू दुबे द्वारा सरस्वती वंदना के सरस पाठ से हुआ। काव्य-गोष्ठी में वरिष्ठ एवं नवोदित कवियों ने अपने गीत, नवगीत एवं कविताओं का भावपूर्ण पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। प्रमुख पाठकों में मुकुट सक्सेना, जगदीश मोहन रावत, रामचरण ‘राग’, गोकुलराम शर्मा ‘दिवाकर’, लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’, किशोर पारीक ‘किशोर’, डॉ. सत्यनारायण शर्मा, डॉ. जितेन्द्र प्रसाद माथुर, अशोक शर्मा ‘कटेठिया’, डॉ. सुशीला शील, कल्याण सिंह शेखावत, राव शिवराजपाल सिंह, डॉ. नवल दुबे, डॉ.अंजू सक्सेना, मंजु दुबे, वैद्य भगवान सहाय पारीक, डॉ. एन. एल. शर्मा, राजकुमार चौहान (पत्रकार), रामानंद शर्मा, नीता भारद्वाज, शीला शर्मा, सुशीला शर्मा ‘कंचन’, पूनम तिलक, सावित्री रायजादा, रेनू जुनेजा, ज्ञानवती सक्सेना, नम्रता शर्मा, रंजीता जोशी, कन्हैया लाल ‘कान्हा’ एवं राहुल समंदर प्रमुख रहे।
सम्मान
इस अवसर पर जयपुर में आयोजित नवगीत दिवस समारोह में वरिष्ठ नवगीत कवि मुकुट सक्सेना एवं जगदीश मोहन रावत, समरस के जयपुर शाखा के अध्यक्ष लक्ष्मण लडीवाला ‘रामानुज’ जकासा के अध्यक्ष किशोर पारीक ‘किशोर’, अलवर के गीतकार रामचरण ‘राग’ एवं गोकुलराम शर्मा ‘दिवाकर’ को शॉल, माला, पटका एवं प्रतीक-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का समापन साहित्यिक सौहार्द, रचनात्मक संवाद और नवगीत की समकालीन भूमिका को सुदृढ़ करने के संकल्प के साथ हुआ।




