
फूलों सा जीवन
फूलों से जीवन का एक
बहुत सरल सा पाठ मिला,
अनुकूल हो या प्रतिकूल
फूल हर मौसम में खिला।१
आँधी, धूप हो या बरसात
सबको वो चुपचाप सहे,
न शिकायत न शोर करे
चारों ओर उनकी सुगंध बहे।२
काँटों के बीच भी खिले
लगे सौंदर्य का दीप जलें,
कभी टूटें नहीं हालात से
इनकी ख़ुशबू जहाँ में फैले।३
सूरज की पहली किरणों से
पंखुड़ियों में इन्द्रधनुषी रंग भरे,
ओस की ठंडी चादर से लिपटे
खिले खिले और सँवरे रहते।४
सदा देना ही है जिनका धर्म
कुछ लेना जिनका काम नहीं,
हर मन को ख़ुशबू से महकाएँ
किसी से भेदभाव करते नहीं।५
घर आँगन और समाज का
माहौल खुशियों से भर जाए,
मनुष्य भी फूल व प्रकृति सा
जब हँसना मुस्कुराना सीख जाए।६
जीवन तब उत्सव बने
और हर दिन आशा जगाए,
फूलों से सीख लें हम सब
पूरी दुनिया खिलकर मुस्कुराए ।७
सुमन बिष्ट, नोएडा



