
ख़त्म अँधेरे का रुआब हो जाएगा।
मेरा चराग़ आफ़ताब हो जाएगा।
गर है नेक़ इरादा व हौसला तो,
राह का पत्थर भी आब हो जाएगा।
छोड़ दो अपनी ये फ़िरक़ापरस्ती,
इससे रिश्ता ख़राब हो जाएगा।
मत करो काम की बातें यहाँ,
बे-वजह सवाल ज़वाब हो जाएगा।
गर तू अपने होंठ से छू ले,
तो पानी भी शराब हो जाएगा।
चनरेज राम अम्बुज



