
कानों में शह्द सी घुलती बातें
मेरे मन को छूती है तेरी बातें
जब भी याद आती है तेरी बातें
मेरी खराब हो जाती है दिन राते
मिलने पर तेरा खिलखिलाना
और हंसकर ये कहना तेरे सिवा
मुझे किसी से नहीं है प्यार
मै तो हर वक़्त करता हूँ तेरा इंतजार
मुझे अक्सर वो तेरी बाते याद
आती है जो मेरे कानों मे
शहद सी घोळती है तेरा धीरे
से मुस्कराना और पलकें झुका लेना।
मेरे मन मे हलछ्ल मचा देती थी
तेरे अंतर्मन को छूने के लिए मै
व्याकुल हो जाता था और तुझे
बाहों मे भरने को जी चाहता था
वो मदमस्त सी हवाएँ
वो सर्दी कपकपती रातें
वो गर्मी की तपती दूपहरी
और बेमौसम बरसातें
मै तो तेरे लिए था अंजाना
तेरी सदगी को देखकर
होगा था दिवाना तू मुझे
छोड़कर और कही नहीं
जस्ना।
पढ़ाई के बहाने मिलना
फिर पास बैठकर कुछ
खट्टी मीठी सी बातें करना
और मेरा नाराज हो जाना
फिर तेरा हँसकर मनाना
तेरा ये कहना की तुम मेरी हो
मेरी ही रहोगी तुम मुझे नहीं
मिली तो तो तेरे बगैर मर
जायेगा ये परवाना
आज भी कानो मे वो शहद सी
घुलती है तेरी बाते अक्सर मेरे
मन को तड़पती है तेरी बातें ये
तेरी ही दी हुई है सौगातें।
संगीता वर्मा
कान्पुर उत्तर प्रदेश




