
सनम के नाम ये महफिल
सजा दो आज ये महफिल, लगी दिल की बुझानी है ।
लबों पे हैं निशा उनके, फना करनी कहानी है ।।
लगा है मर्ज मुझको जो, बना नासूर है ऐसा ।
बुला दो आज महबूबा, दवा वो ही पुरानी है ।।
अगन ऐसी लगी दिल में, तड़पता “रत्न” है दिलबर ।
सुलगते आग का शोला, गजब उसकी जवानी है ।।
जवां दिल की बढ़ी धड़कन, पड़े जो ओस की बूंदे ।
खयालों और ख्वाबों में, सितारों सी रवानी है ।।
शराबी वो निगाहें है, नशीली जाम का प्याला ।
शमा दिल से जलाएंगे, बड़ी दिलकश जवानी है ।।
“रत्न” जो हुस्न बेपर्दा, यकीं कब हो खुदा ऐसा ।
खुदा ऐ इश्क का तोहफा, झुकी पलकें उठानी है ।।
नीलम अग्रवाल रत्न बैंगलोर
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