साहित्य

ग़ज़ल

नीलम अग्रवाल रत्न

सनम के नाम ये महफिल

सजा दो आज ये महफिल, लगी दिल की बुझानी है ।
लबों पे हैं निशा उनके, फना करनी कहानी है ।।

लगा है मर्ज मुझको जो, बना नासूर है ऐसा ।
बुला दो आज महबूबा, दवा वो ही पुरानी है ।।

अगन ऐसी लगी दिल में, तड़पता “रत्न” है दिलबर ।
सुलगते आग का शोला, गजब उसकी जवानी है ।।

जवां दिल की बढ़ी धड़कन, पड़े जो ओस की बूंदे ।
खयालों और ख्वाबों में, सितारों सी रवानी है ।।

शराबी वो निगाहें है, नशीली जाम का प्याला ।
शमा दिल से जलाएंगे, बड़ी दिलकश जवानी है ।।

“रत्न” जो हुस्न बेपर्दा, यकीं कब हो खुदा ऐसा ।
खुदा ऐ इश्क का तोहफा, झुकी पलकें उठानी है ।।

नीलम अग्रवाल रत्न बैंगलोर
🙏🙏

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!