साहित्य

एक पैर से जाप करूंँगी

नीलम अग्रवाल "रत्न"

एक पैर से जाप करूंँगी, करूंँ तपस्या घोर ।
उमा कहे प्रभु हे शिव शंकर, थामो जीवन डोर ।।

मान चुकी हूंँ तुमको भोले, मैं तो अपना नाथ ।
बनकर दुल्हन पर्वत पर ही, रहूंँ आपके साथ ।।
एक बार तो हे शशिशेखर, देखो मेरी ओर ।
उमा कहे प्रभु हे शिव शंकर, थामो जीवन डोर ।।

कठिन तपस्या से खुश होकर, आए शंभू पास ।
श्मशानों में डेरा मेरा, बात सुनाए खास ।।
गौरा का मन द्रवित हुआ तब, भींगी आंँखे कोर ।
उमा कहे प्रभु हे शिव शंकर, थामो जीवन डोर ।।

मेरे गल सर्पों की माला, भूत हमारे मीत ।
तू महलों की राजकुमारी, कैसे होगी प्रीत ।।
इसी रूप पर मैं बलिहारी, पुलकित मेरे पोर ।।
उमा कहे प्रभु हे शिव शंकर, थामो जीवन डोर ।।

नीलम अग्रवाल “रत्न” बैंगलोर
🙏

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!