
प्रेम पावन है जहाँ में बात यह सबको बताएंँ।
साथ मिलकर गीत नगमे आइए हम गुनगुनाएँ।।
जिंदगी की राह दुर्गम अनगिनत कंटक मिलेंगे,
सोच कर अपना कदम उस राह में तब ही बढ़ाएंँ।
देखने में ऊपरी जो है भले लगता यहांँ पर,
पास रहते वो हमेशा पर सदा नश्तर चुभाएँ।
सरहदें जलने लगी फिर भी सभी चुपचाप बैठे,
मिल चलो आओ वतन की आग नफरत की बुझाएँ।
अश्क यादें दिल तन्हाई अल्फाज जो भी है निकलते,
हैं पुरानी रीत रश्में खूब ही जग में रूलाएँ।
कर सदा संघर्ष तू फरियाद तुझसे जिंदगी ए,
प्यार अपनापन समर्पण अब चलो सबको लुटाएँ।
मुश्किलातों से नहीं गीता कभी मुख मोड़ना तू,
एक दिन ये आपदाएंँ छोड़ खुद ही भाग जाएँ।
डॉ गीता पाण्डेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश




