फागोत्सव काव्य गोष्ठी सम्पन्न

निखर उठी खेतों में सरसों, ऋतु वसंत छा गई सखी री।
यौवन झूमे ले अंगड़ाई, धरा संवरती रही सखी री ।।
सत्संग करते फाग खेलते, गली मोहल्ले भारत भर में ।
अधर राधिका से स्वर निकले,बजे बाँसुरी तभी सखी री।।
-लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’
राज. चैंबर के भैरोसिंह शेखावत सभागार में कृतिकार, समरस साहित्य सृजन एवं जकासा की फागोत्सव काव्य गोष्ठी मुख्य लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’ जी की अध्यक्षता और श्री किशोर पारीक ‘किशोर’ जी के कुशल संचालन में सम्पन्न हुई । मुख्य अतिथि श्री मनोज शर्मा जी, से नि.IAS और विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि श्री वरुण चतुर्वेदी जी के स्वागत के साथ श्रीमति चंचल शर्मा चपल जी की वीणा पाणी की सुंदर वंदना के साथ प्रारंभ हुई ।
गोष्ठी में डॉ.अंजू सक्सेना जी, रंजिता जोशी जी, विनीता काबरा जी, डॉ एन एल शर्मा जी, वैद्य भगवान सहाय पारीक जी, राव शिवराजपाल सिंह जी, गोपाल सिंह राघव जी, श्री रितेश शर्मा पथिक’ जी, श्री गोप कुमार मिश्र जी जी, डॉ. सत्यनारण शर्मा जी, श्री अरुण गर्ग जी, भूपेंद्र प्रजापति जी, डॉ. कंचन सक्सेना जी, श्रीमती राजेश्वरी जोशी जी, सोहन प्रकाश सोहन जी, सावित्री रायजादा जी, वरिष्ठ कवि वरुण चतुर्वेदी जी, श्री मनोज शर्मा जी, किशोर पारीक जी एवं श्री लक्ष्मण लड़ीवाला ने शृंगारित गीतों, छंदों, और हास्य रचनाओं से फागोत्सव की खुशनुमा फुहारों से भिगोते हुए खूब तालिया बटोरी ।
अंत में जकासा संस्थापक श्री किशोर पारीक ‘किशोर’ जी ने सभी का आभार व्यक्त किया ।
— नीता भारद्वाज, महासचिव
समरस साहित्य सृजन संस्थान, जिला जयपुर इकाई




