साहित्य

भोले आ गए रे …..

कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी 'राम'

भोले तो आंगन में आ गए रे,
आकर सभी को बुला रहे रे,
भोले तो आंगन में आ गए रे…
झांझर पर गीत सुना रहे रे,
संग गौरा को कैसे लुभा रहे रे,
भोले तो आंगन में आ गए रे…
ढोलक और तासे बजा रहे रे,
संग भोले के हम भी गा रहे रे,
भोले तो आंगन में आ गए रे ..
भोले को देख कृष्णा आ रहे रे,
रामजी को टेर लगा रहे रे,
भोले तो आंगन में आ गए रे ..
तीनों आकर के धूम मचा रहे रे ,
राधा गौरी सीता को बुला रहे रे ,
भोले तो आंगन में आ गए रे….
दे-दे के ताली सब झूम रहे रे,
भोले संग राम कृष्ण बोल रहे रे ,
भोले तो आंगन में आ गए रे …
भक्ति का रस तू पी ले रे,
भोले के रंग में जी ले रे,
भोले तो आंगन में आ गए रे …
(254/312 वां मनका)
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कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी ‘राम’
सी स्पेशल गांधीनगर इन्दौर (म.प्र.)
7869799232

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