
सर्दी के मौसम से पाया छुटकारा।
होली की मस्ती में झूमा जग सारा।
फागुन ने रंग सजाया डूबे आँगन।
ढोल मँजीरे बोल उठे गूँजे प्रांगण।
रंग गुलाल उड़े भीगा तन-मन प्यारा।
होली की मस्ती में झूमा जग सारा।।
रूठे दिल भी आज यहाँ हँसने आएँ।
बैरीपन भूले बिसर गले लग जाएँ ।
प्रेम सुधा रस की धार बहे उजियारा।
होली की मस्ती में झूमे जग सारा।
मुरली की मृदु तान सुने झूमा गोकुल।
सखियों के सँग राधा, श्याम रचे रस कुल।
रास रचे सँग है राधा कृष्णा प्यारा ।
होली की मस्ती में झूमे जग सारा।।
बरसाने में शोर बड़ा फोड़े मटकी।
सखियाँ राधा खेले लठमारी होली ।
रंगीला अनुराग भरा छोड़े धारा।
होली की मस्ती में झूमे जग सारा।
श्याम छिपे गलियों में ले रँग पिचकारी।
धीरे से रंगा राधा को बेचारी।
लाल गुलाबी भीज गई चूनर सारा।
होली की मस्ती में झूमे जग सारा।।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार



