स्वास्थ्य

सावधानी से करें सुबह खाली पेट गैस और एसिडिटी की दवा इस्तेमाल

डॉ रुप कुमार बनर्जी

अनेक लोग सुबह उठते ही खाली पेट गैस या एसिडिटी की दवा ले लेते हैं। उन्हें लगता है कि इससे दिनभर आराम मिलेगा। परंतु यदि यह आदत बिना चिकित्सकीय परामर्श और लंबे समय तक जारी रहे, तो यह शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ सकती है। पेट का अम्ल (Acid) केवल जलन का कारण नहीं है, बल्कि यह पाचन, पोषक तत्वों के अवशोषण और संक्रमण से रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब हम इसे बार-बार दबाते हैं, तो कई प्रकार की बीमारियाँ जन्म ले सकती हैं।

संभावित बीमारियाँ और दुष्प्रभाव :- लगातार और अनियंत्रित एंटासिड के सेवन से निम्न समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं:-
1. रक्त संबंधी रोग:- विटामिन B12 की कमी,आयरन की कमी (एनीमिया),अत्यधिक कमजोरी और चक्कर आना आदि।
2. हड्डियों से जुड़ी बीमारियाँ:- कैल्शियम की कमी, हड्डियों की कमजोरी (ऑस्टियोपोरोसिस),बार-बार फ्रैक्चर का खतरा
3. संक्रमण संबंधी रोग :-बार-बार पेट का संक्रमण,आंतों में हानिकारक जीवाणुओं की वृद्धि, फूड पॉइज़निंग की संभावना बढ़ना
4. पाचन तंत्र की समस्याएँ:- गैस, अपच और पेट फूलना, कब्ज या दस्त।
5. तंत्रिका संबंधी प्रभाव:- याददाश्त में कमी, मानसिक सुस्ती,सिरदर्द।
6. अन्य संभावित जोखिम :- किडनी संबंधी समस्याएँ,हृदय रोग का बढ़ता जोखिम,मैग्नीशियम की कमी,लंबे समय में प्रतिरक्षा शक्ति का कमजोर होना।

इसका असली समाधान क्या है?:- केवल दवा लेने से समस्या जड़ से समाप्त नहीं होती है।एसिडिटी का मूल कारण अक्सर होता है:-अनियमित भोजन ,अत्यधिक मसालेदार और तला भोजन,धूम्रपान और शराब का सेवन,अधिक चाय-कॉफी,मानसिक तनाव,देर रात जागना और मोबाइल अशफाक कंप्यूटर पर काम करना।

एसिडिटी को दूर रखने का स्वास्थ्यवर्धक उपाय :-सुबह गुनगुना पानी,नियमित समय पर संतुलित भोजन,अपने वजन पर नियंत्रण, ताजे फल, सूखे और हरी सब्जियाँ का सेवन , जंक फूड, फास्ट फूड, स्ट्रीट फूड और पैक्ड फूड से दूरी,अधिक पानी का सेवन,सप्ताह में कम से कम 5 दिन कसरत योग और प्राणायाम,तनाव नियंत्रण,पर्याप्त नींद।
संतुलन ही वास्तविक औषधि है।दवा आवश्यकता होने पर अवश्य लें, परंतु चिकित्सक की सलाह से और सीमित अवधि के लिए।शरीर की प्राकृतिक अग्नि (पाचन शक्ति) को नष्ट करके स्वास्थ्य प्राप्त नहीं किया जा सकता।रोग को दबाने से नहीं, कारण को सुधारने से स्वास्थ्य मिलता है।दवा पर निर्भरता नहीं, बल्कि जीवनशैली में सुधार ही स्थायी समाधान है।

डॉ रुप कुमार बनर्जी
होमियोपैथिक चिकित्सक

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