साहित्य

राम मंदिर की संघर्ष यात्रा

डॉ गीता पांडेय "अपराजिता"

भव्य मंदिर श्री राम का हो, इसी हेतु संघर्ष किए हैं।
सदियों से ही अनगिन हिंदू, प्राणों का बलिदान दिए हैं।।

वर्ष पाँच सौ पूर्व मुगल उस, बाबर ने मंदिर तुड़वाया।
राघव का अस्तित्व खत्म कर,अपनी मस्जिद था बनवाया।।

मुगलों का साम्राज्य बड़ा था,मजहब के अतिशय कट्टर थे।
निर्दय क्रूर मुगल शासक वे, मज़हब के प्रति बहुत प्रखर थे।।

हिंदू मंदिर तोड़-तोड़ कर, अपनी मस्जिद बनवाते थे।
धर्म सुसंस्कृति और सनातन, करके नष्ट गर्व पाते थे।।

कई पीढ़ियांँ मुगल वंश की, भारतवर्ष में राज किया था।
हिंदू का अस्तित्व मिटाकर, आधिपत्य स्वसमाज किया था।।

भारत मांँ की माँ बहनों पर, हरपल अत्याचार किए थे।
बड़े आततायी थे मुगली, सबको कष्ट अपार दिए थे।।

कई बरस तक राम लला जी, रहे तंबुओं के घेरे में।
न्यायालय विवाद में फंँसकर,स्वयं पड़े थे फेरे में।।

जन्मभूमि का वाद मुकदमा, चला उच्चतम न्यायालय में।
हिंदू मुस्लिम में तनाव था, दोनों पक्ष रहे अति भय में।।

राम विरोधी कितने नेता राघवेंद्र पर प्रश्न उठाते।
राम संस्कृति के नायक हैं उनका ही अस्तित्व मिटाते।।

जीत सत्य की ही होती है, श्री रघुवर को न्याय मिल गया।
राम भक्त हो गए प्रफुल्लित,महा हर्ष का सुमन खिल गया।।

राम मंदिर संघर्ष यात्रा,
बहुत कठिन थी भरी चुनौती।
खोए बहुत तभी मिल पाई, हिंदू जन को निजी बपौती।।

आज भव्य मंदिर राघव का, लिए दिव्यता तैयार खड़ा।
राम भक्त पूजन सब करते, धर्म सनातन आधार बड़ा ।।

विश्व पटल पर स्थापित महिमा,अवधपुरी का पुण्य धाम है।
चमक रही शुचि गौरव गरिमा, शीश झुका करते प्रणाम है।।

डॉ गीता पांडेय “अपराजिता”
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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