
पटना। भारतीय संस्कृति में हनुमान जी केवल भक्ति और शक्ति के प्रतीक ही नहीं, बल्कि सत्य, साहस और न्याय के आदर्श भी हैं। आज के समय में यदि उनके चरित्र को एक अधिवक्ता की दृष्टि से देखा जाए तो उसमें न्याय व्यवस्था के कई महत्वपूर्ण सिद्धांत दिखाई देते हैं। यह विचार अधिवक्ता कुमुद रंजन सिंह ने व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि हनुमान जी का जीवन सत्य और धर्म की रक्षा का सर्वोत्तम उदाहरण है। उन्होंने हर परिस्थिति में अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई और धर्म के मार्ग पर चलते हुए समाज को न्याय का संदेश दिया। अधिवक्ता कुमुद रंजन सिंह ने कहा कि जिस प्रकार हनुमान जी ने भगवान राम के प्रति निष्ठा और समर्पण के साथ अधर्म के विरुद्ध संघर्ष किया, उसी प्रकार आज के अधिवक्ता का भी कर्तव्य है कि वह सत्य और न्याय की रक्षा के लिए निर्भीक होकर कार्य करे।
उन्होंने कहा कि रामायण में हनुमान जी की बुद्धिमत्ता, कूटनीति और साहस स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। लंका में जाकर उन्होंने जिस प्रकार सत्य का संदेश दिया और अन्याय के विरुद्ध खड़े हुए, वह आज भी समाज और न्याय व्यवस्था के लिए प्रेरणास्रोत है।
अधिवक्ता कुमुद रंजन सिंह ने कहा कि न्याय के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को हनुमान जी के जीवन से साहस, सत्यनिष्ठा और कर्तव्यपरायणता की प्रेरणा लेनी चाहिए। उनका जीवन यह संदेश देता है कि जब उद्देश्य न्याय और सत्य की रक्षा हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी पीछे नहीं हटना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को ऐसे ही मूल्यों की आवश्यकता है, जिससे न्याय व्यवस्था मजबूत हो और आम नागरिकों का विश्वास कानून पर और अधिक सुदृढ़ हो सके।
हनुमान जी का आदर्श चरित्र आज भी समाज को यह सिखाता है कि सत्य, साहस और निष्ठा के मार्ग पर चलकर ही न्याय और धर्म की स्थापना संभव है।




