
हक है सभी को खुश रहने का,
अपनी-अपनी रची-रचाई दुनिया में।
फिर चाहे वो जीव हो या जन्तु,
चर हो या अचर,जड़ हो या चेतन,
खेचर,भूचर,जलचर या चाहे हों निशाचर,
नर हो या मादा, बाल हो या वृद्ध।
कितने मनोयोग से सृजित है ये सृष्टि !
लगाकर देख तू जरा अनुमान,
यह दुनिया तो हर भावों का पुलिंदा है।
उठा ले खुशियों का अंबार
क्यों करता है गम?
आने न दे कभी छाया भी गमों की
ऐसी सोच तू बना तो सही,
लुटाता चल खुशियां दोंनो हाथों से,
फिर देख तेरी अपनी दुनिया खुशियों के सितारों से सजी होगी।
सुना नहीं क्या?
जो बोओगे वही काटोगे
जो बाँटोगे वही मिलेगा
एक हाँथ देना है दूजे हाँथ लेना है।
यूँ ही खुश रहना है ये दुनिया का मेला है।🌹🌹😊😊❤❤
सुषमा श्रीवास्तव




