
नीला सा अम्बर हरी-भरी धरती।
प्रकृति की गोदी में दुनिया सॅंवरती।।
सूरज की किरणें सोना बरसाएँ,
चाँदनी रातें सपनों को सजाएँ।
पंछी मधुरम ताने छेड़ चहकते,
जीवन के आँगन में खुशी बरसती।
नीला सा अम्बर हरी-भरी धरती।
प्रकृति की गोदी में दुनिया सँवरती।।
बरखा की बूँदें मोती बन जातीं,
सूखी धरती को हरियाली लातीं।
माटी की खुशबू मन को ले छूती,
जीवन की धारा भी फिर से झरती।
नीला सा अम्बर हरी-भरी धरती।
प्रकृति की गोदी में दुनिया सँवरती।।
फागुन फाग आया रंग बरसाता,
सावन मधुर प्रेम के गीत सुनाता।
ऋतुओं की माला पहने है धरती,
हर मौसम में बस खुशियाँ ही भरती।
नीला सा अम्बर हरी-भरी धरती।
प्रकृति की गोदी में दुनिया सँवरती।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




